बुखार – Bukhar – Fever

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बुखार – बुखार (Bukhar) बड़ी ही आम समस्या है। ज्यादातर लोग साल में 1-2 बार तो इससे पीड़ित होते ही हैं। बुखार अपने आप में समस्या होने के साथ ही कई बार किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या का लक्षण भी हो सकता है। इस लेख मे आपको बुखार (Fever) से जुडी हुई बहुत सारी जानकारियाँ मिलेगी जो आपके लिये मददगार साबित होगी। आशा करता हूँ की आपको ये लेख पसंद आएगा।

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बुखार

बुखार – Bukhar – Fever

बुखार क्या है – Bukhar kya hota hai – What is Fever

Bukhar in english is called Fever. बुखार सामान्य से अधिक शरीर का तापमान है। इसे उच्च तापमान, अतिताप या पाइरेक्सिया भी कहा जाता है, और यह आमतौर पर एक संकेत है कि आपका शरीर आपको संक्रमण से स्वस्थ रखने के लिए काम कर रहा है। सामान्य शरीर का तापमान सभी के लिए अलग होता है लेकिन 97°F से 99°F के बीच होता है।

नार्मल बुखार कितना होना चाहिए – Normal bukhar kitna hona chahiye – Normal Fever Temperature

  • 100.4°F के तापमान को बुखार माना जाता है।
  • वयस्कों के लिए, बुखार तब होता है जब आपका तापमान 100.4°F से अधिक होता है।
  • बच्चों के लिए, बुखार तब होता है जब उनका तापमान 100.4°F से अधिक होता है (रेक्टली मापा जाता है); 99.5°F (मौखिक रूप से या बांह के नीचे मापा जाता है)

बुखार के लक्षण – Bukhar ke lakshan – Fever Symptoms

बुखार के कुछ सबसे सामान्य लक्षण:

  • वयस्कों और बच्चों में 100.4°F (38°C) से ऊपर का तापमान
  • कमज़ोरी
  • थकान
  • सिरदर्द
  • शरीर दर्द
  • चिढ़
  • कंपकंपी और ठंड लगना
  • डिहाइड्रेशन
  • भूख में कमी
  • चक्कर आना
  • पसीना आना
  • घबराहट
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • आँखों में दर्द

एक व्यक्ति जिसे बहुत तेज बुखार (104°F से अधिक तापमान) हो गया है वो मतिभ्रम, आक्षेप और भ्रम का अनुभव कर सकता है। टॉडलर्स और बच्चे भी ये लक्षण दिखा सकते है।

इसी तरह, जिन बच्चों को संक्रमण के परिणामस्वरूप बुखार हुआ है, उनमें भी कान में दर्द, उल्टी, गले में खराश, दस्त और खांसी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

बुखार आने के कारण – Bukhar kaise hota hai – Fever Causes

बुखार तब होता है, जब हाइपोथैलेमस शरीर के सामान्य तापमान को बढ़ा देता है। ऐसी कई स्वास्थ्य स्थितियां हो सकती हैं, जिनके कारण हाइपोथैलेमस शरीर के तापमान को बढ़ाने लग जाता है। इन स्वास्थ्य समस्याओं में निम्न शामिल हैं –

  • जुकाम, फ्लू, निमोनिया व अन्य प्रकार के संक्रमण
  • कुछ प्रकार के टीकाकरण जैसे डिप्थीरिया, टेटनस व कोविड-19
  • बच्चों के दांत आना
  • सूजन व लालिमा से संबंधित रोग जैसे रूमेटाइड अर्थराइटिस व क्रोन रोग
  • रक्त के थक्के जमना
  • गंभीर रूप से सनबर्न (त्वचा धूप से जलना) हो जाना
  • फेफड़ों से संबंधित रोग होना
  • कुछ प्रकार के कैंसर जैसे हॉज्किंग डिजीज
  • लू लगना
  • शरीर में पानी की कमी होना
  • नशीले पदार्थ लेना (या उन्हें छोड़ने के बाद होने वाली बेचैनी के साथ भी बुखार हो सकता है)

इनके अलावा अन्य बीमारियों के इलाज के लिए ली जाने वाली दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में भी बुखार हो सकता है। इन दवाओं में प्रमुख रूप से फेनीटोइन (Phenytoin), क्विनिडाइन (Quinidine) और एंटी-ट्यूबरकुलर (Antitubercular) शामिल हैं।

इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होना, साफ-सफाई न रखना, प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाएं (Immunosuppressants) खाना, वृद्धावस्था व बचपन आदि कई कारक हो सकते हैं, जो बुखार होने के खतरे को बढ़ा देते हैं।

बुखार कैसे चेक करें – Bukhar kaise check kare – How to Check Fever

बुखार में तापमान की जांच करने के लिए, आप कई प्रकार के थर्मामीटरों में से किसी एक को चुन सकते हैं। ओरल, रेक्टल, ईयर (टायम्पेनिक) और फोरहेड (टेम्पोरल आर्टरी) थर्मामीटर कुछ ऐसे थर्मामीटर हैं जिनका आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

मौखिक थर्मामीटर का उपयोग करने के लिए:

  • थर्मामीटर की नोक को साफ करें
  • थर्मामीटर की नोक को जीभ के नीचे रखें
  • सुनिश्चित करें कि टिप मुंह के पीछे की ओर इशारा करती है
  • मुंह बंद करे
  • एक मिनट रुके
  • तापमान पढ़ें

बुखार उतारने के घरेलू उपाय – Bukhar ka gharelu upay – Home Remedies for Fever

1. सेब का सिरका है बुखार का इलाज – Apple Cider Vinegar for Fever Treatment

एप्पल साइडर विनेगर तेज बुखार के लिए अत्यधिक प्रभावी इलाज है। इससे बुखार तेजी से कम होता है, क्योंकि इसमें मौजूद अम्ल त्वचा से गर्मी को निकालने का काम करते हैं। इसमें खनिज भी भरपूर मात्रा में होते हैं और यह बुखार की वजह से शरीर में होने वाले खनिज की कमी को पूरा करता है।

नहाने के गुनगुने पानी आधा कप सेब का सिरका मिलाकर इससे 10 मिनट तक नहाएं। शरीर का तापमान बढ़ने पर इस उपाय को दोहरा सकते हैं। सेब के सिरके युक्त पानी में एक कपड़ा भिगा लें और उसे निचोड़कर माथे, पेट और तलवों पर रखने से भी बुखार उतर जाता है। आप चाहें को एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका और शहद मिलाकर पी सकते हैं, इससे बुखार उतर जाएगा।

2. बुखार होने पर करें ठंडे पानी की पट्टियां – Cold Water Strips

अगर आपको तेज बुखार है तो इसे कम करने के लिए साफ कपडे को गीला करें और निचोड़कर माथे, बगल, हाथ, पैर और शरीर के तापमान को कम करने ले लिए पट्टी करें।

बुखार उतारने के लिए गीली पट्टियों को गर्दन पर भी रख सकते हैं। पट्टी को कुछ-कुछ देर में बदलते रहें, इससे आपका बुखार उतर जाएगा। ध्यान रहे कि बुखार उतारने के लिए बहुत ज्यादा ठंडे पानी का इस्तेमाल न करें।

3. पुदीना से करें बुखार का उपाय – Mint Leaves for Fever Treatment

एक कप गर्म पानी में एक चम्मच पुदीने की पत्तियां पीसकर मिलाएं, 10 मिनट तक उबालने के बाद इसे छान ले और इस मिश्रण में शहद मिलाकर इसका सेवन करें। यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने में मदद करता है।

पुदीने की पत्तियों के साथ काली मिर्च का पाउडर और आधा चम्मच पीपली पाउडर मिलाकर उसमें अदरक पाउडर मिलाएं और पानी को उबालकर आधा कर लें। इस मिश्रण को छानकर दिन में तीन बार पिएं।

4. हल्दी-दूध का सेवन करें और बुखार भगाएं – Turmeric milk for Fever Treatment

हल्दी के गुण बुखार कम करने में मददगार होते हैं। हल्दी में एंटीवायरल, एंटीफंगल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। हल्दी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है और संक्रमण से लड़ने में मददगार होती है।

एक कप दूध में आधा चम्मच हल्दी और चौथाई चम्मच काली मिर्च पाउडर मिलाकर दिन में दो बार लेने से बुखार कम करने में मदद मिलेगी।

5. तुलसी के पत्तों का सेवन करने से उतरेगा बुखार – Tulsi leaves for Fever Treatment

तुलसी पोषक तत्वों से भरपूर जड़ी-बूटी है, जिसका आयुर्वेद में बहुत इस्तेमाल होता है। यह एंटीबायोटिक दवाओं की तरह काम करती है और इसके सेवन से बुखार तेजी से कम होता है।

एक कप पानी में तुलसी की 20-25 पत्तियों और एक चम्मच घिसी हुई अदरक को उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो इस मिश्रण में थोड़ा सा शहद मिलाकर तीन दिन के लिए दिन में तीन बार इसका सेवन करें।

6. लहसुन है बुखार का घरेलू उपाय – Garlic for Fever Treatment

लहसुन की तासीर भले ही गर्म होती हो, लेकिन यह बुखार उतारने में लाभदायक होता है। इसके सेवन से पसीना आता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। लहसुन में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, जो रोगों से लड़ने में मदद करते हैं।

बुखार में लहसुन की दो फांक को छोटा-छोटा काटकर एक कप पानी के साथ उबाल लें। अब छानकर पानी को पी जाएं, दिन में दो बार ऐसा करें। लहसुन के पेस्ट को जैतून के तेल के साथ मिलाकर पैर के तलवों पर लगाकर रातभर के लिए छोड़ दें, इससे आराम मिलेगा।

7. किशमिश है बुखार का अचूक उपाय – Raisins for Fever Treatment

बुखार कम करने और संक्रमण से लड़ने में किशमिश मददगार होते हैं। इनमें फिनोलिक फाइटोन्यट्रिएंट्स होते हैं, जिनमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।

बुखार में किशमिश शरीर के लिए टॉनिक की तरह काम करते हैं। यह उपाय करने के लिए 20-25 किशमिश को पानी भीगने के लिए रख दें। नरम होने पर किशमिश को पानी में पीस लें और फिर पानी को छान लें। इसमें आधे नींबू का रस मिलाकर इसका सेवन दिन में दो बार करें।

8. चंदन है बुखार का अचूक उपाय – Sandalwood Powder for Fever Treatment

चंदन की तासीर ठंडी होती है और यह बुखाव व सूजन को कम करने में मदद करता है। चंदन मन को शांति और शीतलता देने के लिए जाना जाता है और यह बुखार होने पर सिरदर्द में भी राहत पहुंचाता है।

आधा चम्मच चंदन पाउडर में थोड़ा सा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें और इसे माथे पर लगाएं। जब तक राहत न मिले इस प्रक्रिया को दोहराते रहें।

9. अदरक है बुखार का रामबाण इलाज – Ginger for Fever Treatment

अदरक की मदद से शरीर से अतिरिक्त गर्मी को बाहर निकाला जा सकता है। अदरक प्राकृतिक तौर पर एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल एजेंट है और यह प्रतिरक्षा प्रणाली में किसी प्रकार का संक्रमण होने से भी रोकता है।

नहाने के पानी में अदरक पाउडर डालने और नहाने के बाद कंबल से शरीर को ढक ले तो आपको पसीना आएगा और बुखार उतर जाएगा। अदरक की चाय पीने से भी बुखार में राहत मिलती है।

बुखार की दवाई – Bukhar ki dava – Bukhar ki tablet

1. पेरासिटामोल – Paracetamol

पेरासिटामोल दवा बुखार को कम करने के लिए ली जा सकती है। इसके अलावा, इस दवा से सिरदर्द, गैस, दांतों का दर्द, कमर का दर्द व ओस्टियोआर्थराइटिस जैसी शारीरिक समस्याओं से भी आराम मिल सकता है।

2. बुखार की सबसे अच्छी दवा – आइबूप्रोफेन – Ibuprofen

आइबूप्रोफेन को भी बुखार के लिए सबसे अच्छी मेडिसिन माना जाता है. इसके तहत निम्न प्रकार की मेडिसिन आती हैं –

  • एडविल – एडविल दवा का सेवन बुखार को कम करने में सहायक है। इसके अलावा, मसल पेन, अर्थराइटिस, पीरियड्स पेन व सिरदर्द जैसी समस्याओं में भी एडविल का सेवन फायदेमंद हो सकता है।
  • नेप्रोक्सेन – नेप्रोक्सेन के सेवन से बुखार और अर्थराइटिस जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। इसे उपयोगी नॉनस्टेरॉयडल व एंटी इंफ्लेमेटरी दवा माना गया है।

3. वोल्टरेन – Voltaren

वोल्टरेन दवा बुखार, दर्द व सूजन को कम करने में सहायक है। वायरल इंफेक्शन में भी डाक्टर इस दवा को लेने की सलाह देते हैं।

अगर कोई बुखार के चलते परेशान है, तो वो डॉक्टर की सलाह पर उपरोक्त बताई गई दवाओं का सेवन कर सकता है। ये दवाएं बुखार के साथ-साथ अन्य समस्याओं में भी फायदेमंद साबित हो सकती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओ का सेवन ना करे।

बुखार की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा – Bukhar ki ayurvedic dawa – Ayurvedic Medicine for Fever

बुखार के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां

1. गुडूची

  • गुडूची प्रमुख तौर पर परिसंचरण और पाचन तंत्र से संबंधित रोगों का इलाज और उन्‍हें रोकने का काम करती है।
  • ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और तीनों दोषों को शांत करती है।
  • गुडूची पित्त रोगों, गों बुखार, कफ के कारण हुए पीलिया और जीर्ण मलेरिया के बुखार में उपयोगी है।
  • ये पाचन को बेहतर एवं खून को साफ करती है।

2. पिप्‍पली

  • ये पाचन, श्‍वसन और प्रजनन प्रणाली पर कार्य करती है। पिप्‍पली बुखार के सामान्‍य लक्षणों जैसे कि दर्द, जुकाम और खांसी से राहत दिलाती है। इसमें वायुनाशी और कृमिनाशक गुण मौजूद होते हैं।
  • पाचन अग्‍नि (इसके कम होने के कारण बुखार होता है) में सुधार करने में पिप्‍पली असरकारी होती है। ये बुखार के सामान्‍य लक्षणों जैसे कि दर्द, जुकाम और खांसी से राहत दिलाती है।
  • पिप्‍पली शरीर से अमा को भी बाहर निकालती है। पिप्‍पली से पेट में ट्यूमर, अस्‍थमा, गठिया, रुमेटिक दर्द, कफ विकारों और साइटिका का इलाज भी किया जा सकता है।
  • पिप्‍पली के कारण पित्त दोष बढ़ सकता है इसलिए पित्त प्रधान वाले व्‍यक्‍ति को पिप्‍प्‍ली का इस्‍तेमाल सावधानीपूर्वक करना चाहिए

3. वासा

  • ये श्‍वसन, परिसंचरण, तंत्रिका और पाचन प्रणाली पर कार्य करती है। ये मूत्रवर्द्धक, मांसपेशियों में ऐंठन दूर करने और कफ निस्‍सारक (बलगम खत्‍म करने वाले) कार्य करती है।
  • मूत्रवर्द्धक कार्य की वजह से व्‍यक्‍ति को बार-बार पेशाब आता है जिससे शरीर से अमा बाहर निकल जाता है और बुखार कम होता है।
  • खांसी, कफ विकारों, डायबिटीज और मसूड़ों से खून आने की समस्‍या में भी वासा उपयोगी है।

4. आमलकी

  • आमलकी परिसंचरण, पाचन और उत्‍सर्जन प्रणाली पर कार्य करता है। इसमें पोषण देने वाले शक्‍तिवर्द्धक, ऊर्जादायक और भूख बढ़ाने वाले गुण होते हैं जो कि त्रिदोष को शांत करने में सक्षम है।
  • ये सभी प्रकार के पित्त रोगों, बुखार, गठिया, कमजोरी, आंखों या फेफड़ों में सूजन, लिवर और पाचन मार्ग से संबंधित विकारों को नियंत्रित करने में उपयोगी है।
  • आमलकी की वजह से दस्‍त हो सकते हैं और गर्भावस्‍था के दौरान इसका इस्‍तेमाल सावधानीपूर्वक करना चाहिए

5. अदरक

  • अदरक शरीर के पाचन और श्‍वसन तंत्र पर कार्य करती है। ये दर्द से राहत दिलाती है और वायुनाशी (पेट फूलने की समस्‍या को कम करना), पाचक और कफ निस्‍सारक कार्य करती है। इस प्रकार अदरक बुखार से संबंधित लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती है।
  • वात, पित्त और कफ के असंतुलन के कारण हुए रोगों को नियंत्रित करने के लिए अदरक का इस्‍तेमाल किया जाता है। शुंथि (सूखी अदरक) अग्‍नि को बढ़ाती है और कफ को कम करती है।
  • इससे शरीर में पित्त बढ़ता है इसलिए ब्‍लीडिंग से संबंधित रोगों और अल्‍सर में इसका इस्‍तेमाल सावधानीपूर्वक करना चाहिए

6. मुस्‍ता

  • मुस्‍ता पाचन और परिसंचरण प्रणाली पर कार्य करती है। ये वायुनाशी, उत्तेजक, मूत्रवर्द्धक, भूख बढ़ाने, फंगसरोधी और कृमिनाशक कार्य करती है।
  • मुस्‍ता के मूत्रवर्द्धक गुण खासतौर पर बुखार को नियंत्रित करने में मदद करते हैं क्‍योंकि इससे बार-बार पेशाब आता है जिससे शरीर से अमा निकल जाता है।

7. भूमि आमलकी

  • पाचन, प्रजनन और मूत्र प्रणाली से संबंधित विकारों को नियंत्रित करने में भूमि आमलकी उपयोगी है।
  • भूमि आमलकी से पीलिया, बाहरी सूजन और मसूड़ों से खून आने का इलाज किया जा सकता है। ये सभी समस्‍याएं बुखार से जुड़ी हुई हैं जिन्‍हें दूर कर भूमि आमलकी बुखार को नियंत्रित करने में मदद करती है।

बुखार के लिए आयुर्वेदिक औषधियां

1. मृत्‍युंजय रस

  • इसमें एक निश्चित मात्रा में शुद्ध हिंगुल चूर्ण, शुद्ध वत्सनाभ चूर्ण, मारीच (काली मिर्च) चूर्ण, पिप्‍पली चूर्ण, शुद्ध टंकण और शुद्ध गंधक मौजूद है।
  • ये बुखार पैदा करने वाले कई बैक्‍टीरियल संक्रमण में उपयोगी है।

2. संजीवनी वटी

  • इसमें विभिन्‍न सामग्री जैसे कि शुंथि, त्रिफला (आमलकी, विभीतकी और हरीतकी का मिश्रण), गुडुची, यष्टिमधु (मुलेठी), भल्‍लातक और वत्‍सनाभ मौजूद है। वत्‍सनाभ को ज्‍वरनाशक (बुखार कम करने वाली) जड़ी बूटी के रूप में भी जाना जाता है।
  • ये टाइफाइड बुखार, सिरदर्द और पेट की गड़बड़ी को ठीक करने में उपयोगी है।

3. त्रिभुवनकीर्ति रस

  • ये एक हर्बो-मिनरल (जड़ी बूटियों और खनिज पदार्थों का मिश्रण) औषधि है जिसमें शुंथि, मारीच, पिप्‍पली, तुलसी, धतूरा और अदरक जैसी कई जड़ी बूटियां मौजूद हैं।
  • बुखार का कारण बने प्रधान दोष के आधार पर इसका इस्‍तेमाल विभिन्‍न भस्‍मों (ऑक्सीजन और वायु में उच्च तामपान पर गर्म करके तैयार हुई) जैसे कि गोदंती भस्‍म, श्रृंग भस्‍म और अभ्रक भस्‍क के साथ किया जाता है।
  • ये शरीर पर पसीना लाकर और दर्द से राहत दिलाकर बुखार का इलाज करती है।
  • इसके अलावा त्रिभुवनकीर्ति रस से माइग्रेन, इंफ्लुएंजा, लेरिन्जाइटिस (स्‍वर तंत्र में सूजन), फेरिंजाइटिस (गले में सूजन), निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, खसरा और टॉन्सिलाइटिस को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।

4. सितोपलादि चूर्ण

  • सितोपलादि चूर्ण में निश्‍चित मात्रा में मिश्री, वंशलोचन, छोटी पिप्‍पली, छोटी इलायची और दालचीनी मौजूद है।
  • ये बुखार, फ्लू, माइग्रेन और श्‍वसन विकारों के इलाज में असरकारी है। औषधि से फ्लू के लक्षणों से शुरुआती तीन से चार दिनों में ही राहत मिल जाती है जबकि फ्लू को पूरी तरह से ठीक होने में आठ सप्‍ताह का समय लगता है।
  • जुकाम में सिर में कफ जमने के कारण हुए सिरदर्द के इलाज में भी ये मदद करती है।

व्यक्ति की प्रकृति और कई कारणों के आधार पर चिकित्सा पद्धति निर्धारित की जाती है। इसलिए उचित औषधि, रोग के निदान हेतु इन आयुर्वेदिक दवाओं एवं औषधियो को लेने से पूर्व आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें

बार-बार बुखार आने के कारण और उपाय – Bar bar bukhar aana

बार-बार बुखार आने के लक्षण

  • 100.4 डिग्री फारेनहाइड से ऊपर तापमान होना
  • ठंड लगना
  • त्वचा का गर्म होना
  • थकान महसूस होना
  • चिढ़चिढ़ापन होना
  • सक्रिय न रहना
  • मूड खराब रहना

बार-बार बुखार आने के कारण

1. बैक्टीरियल इंफेक्शन

बैक्टीरियल इंफेक्शन भी बार-बार बुखार आने की वजह हो सकता है। खासकर बच्चों को अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन व यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की वजह से बार-बार बुखार आ सकता है।

2. वायरस

कई दफा बार-बार बुखार आने की वजह कोई वायरस हो सकता है, जो शरीर में अपना घर बना लेता है। दरअसल, बच्चों का शरीर वायरस से निपटने के लिए कमजोर होता है, जिसके कारण बार-बार बुखार आता रहता है।

3. वैक्सीनेशन

बच्चे को लगने वाले टीके के कारण भी बार-बार बुखार आ सकता है। वैक्सीनेशन के बाद छोटे बच्चे को बुखार आना सामान्य माना गया है। आमतौर पर ये बुखार एक-दो दिन में अपने उतर जाता है।

4. पीरियॉडिक फीवर
  • कई बार बार-बार बुखार आना बिना किसी वायरस या बैक्टीरियल इंफेक्शन के भी हो जाता है, इसे पीरियॉडिक फीवर कहा जाता है।
  • इसका कोई पैटर्न और कारण नहीं होता है। यह अमूमन जेनेटिक डिफेक्ट की वजह से हो सकता है।
  • जब बार-बार बुखार आने को पीरियॉडिक फीवर सिंड्रोम से जोड़कर देखा जाता है, तो शरीर का तापमान जेनेटिक डिफेक्ट की वजह से ज्यादा हो सकता है।
  • कई बार दिन के अलग-अलग समय में भी बुखार आ जाता है। यह नॉर्मल बॉडी टेम्परेचर से थोड़ा ही ज्यादा रहता है। यह बुखार थोड़े समय के बाद अपने आप चला भी जाता है।

बार-बार बुखार आने को ठीक करने के उपाय और इलाज

1. दवाइयों का सेवन

एसिटामिनोफेन के सेवन से बुखार के लक्षणों को मैनेज और शरीर के तापमान को कम करने में मदद मिल सकती है। बच्चे को ये दवा देने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। बच्चे को कितनी दवा देनी है, यह बच्चे के वजन और उम्र के अनुसार डॉक्टर ही तय कर सकते हैं।

2. पर्याप्त आराम

बार-बार बुखार आने से शरीर को बहुत थकान महसूस होती है। ऐसे में पर्याप्त आराम करने को कहा जाता है, इससे शरीर को बुखार से लड़ने में मदद मिलती है।

3. तरल पदार्थ का सेवन

बार-बार बुखार आने पर लिक्विड का सेवन, खासकर पानी पीना जरूरी हो जाता है। इससे शरीर डिहाइड्रेट नहीं होता है और रिकवर होने में भी मदद मिलती है।

तेज बुखार में क्या करना चाहिए – Tej bukhar me kya kare

जब शरीर का तापमान सामान्य से बढ़कर 104 से 106 डिग्री फारेनहाइड के पार हो जाता है, तो उसे बहुत तेज बुखार होना कहा जाता है। यह स्थिति आपातकालीन होती है और इसके लिए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। तेज बुखार का सही इलाज न होने पर इससे मस्तिष्क या शरीर के अन्य अंगों को स्थायी नुकसान और मौत भी हो सकती है।

तेज बुखार होना एक आपातकालीन स्थिति होती है, जिसके लिए व्यक्ति को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। मदद मिलने तक आप रोगी की निम्नलिखित तरीके से प्राथमिक चिकित्सा कर सकते हैं:

1. व्यक्ति को ठंडे पानी से नहलाएं।
2. व्यक्ति के शरीर पर आइस पैक रखें और ठंडे पानी का छिड़काव करें।
3. अगर जरुरत महसूस हो तो व्यक्ति को ठन्डे पानी से भिगो दें।
4. व्यक्ति के माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां करें।
5. व्यक्ति को ठंडी हवा दें।
6. व्यक्ति को कोई भी दवा बिना डॉक्टर से पूछे न दें।
7. व्यक्ति के शरीर पर गीली चादर या तौलिये डाल दें और उस पर ठंडी हवा करें, ताकि पानी भाप बनकर उड़ सके और शरीर का तापमान कम हो सके।
8. इसके अलावा अगर व्यक्ति ने बहुत टाइट कपडे पहने हैं, तो उन्हें उतार दें।

तेज बुखार होने पर सबसे पहले व्यक्ति के शरीर के तापमान को कम करने का प्रयास करना चाहिए। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टर इसके कारण का इलाज करते हैं।

बुखार में क्या खाना चाहिए – Bukhar me kya khana chahiye

बुखार के दौरान भूख कम लगना आम है, लेकिन शरीर को आवश्यक पोषक तत्व और खनिज देने के लिए पौष्टिक भोजन करना चाहिए। आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ हीलिंग प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। कुछ खाद्य पदार्थ हैं:

  • सब्जियां : सब्जियां शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक हैं। अच्छी तरह से पका हुआ सब्जी का व्यंजन शरीर को आवश्यक विटामिन और खनिज प्रदान करने में मदद करता है। आपको गाजर, पालक और कद्दू जैसी सब्जियां खानी चाहिए।
  • फल : नींबू, संतरा और अंगूर जैसे खट्टे फलों में विटामिन सी और फ्लेवोनोइड्स होते हैं, जो प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने और बुखार से लड़ने में मदद करते हैं। साथ ही जामुन, कीवी और सेब जैसे फल भी मदद करते हैं।
  • दही : दही के सेवन से उसमें मौजूद गुड बैक्टीरिया (लैक्टोबैसिलस) के द्वारा व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • नारियल पानी : बुखार के दौरान हाइड्रेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नारियल पानी आवश्यक तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरा होता है जिसकी शरीर को आवश्यकता होती है। यह हाइड्रेशन का बहुत अच्छा स्रोत है।
  • हर्बल टी : चाय की पत्तियां इम्युनिटी को बढ़ाती हैं क्योंकि ये पॉलीफेनोल, फ्लेवोनोइड और कैटेचिन से भरपूर होती हैं। चाय में पाए जाने वाले ये पौधे के यौगिक वायरस और बैक्टीरिया से बचाने में मदद करते हैं।

पुराना से पुराना बुखार का इलाज – Purana Bukhar

  • जीर्ण ज्वर में बड़ी इलायची के बीज 10 ग्राम, बेल की जड़ की छाल 10 ग्राम, पुनर्नवा की जड़ 10 ग्राम तीनों को कूटकर काढ़ा बना लें। इसे 4-4 चम्मच दिन में तीन बार पिएं। इस प्रयोग से पुराना बुखार भी चला जाता है।
  • गाय के दूध में जीरे को डालकर पका लें और जीरे को सुखाकर चूर्ण कर लें। इस चूर्ण में समभाग मिश्री पीसकर मिला लें। इसे 1-1 चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ लेने से पुराना बुखार चला जाता है।

बुखार उतारने का मंत्र – Bukhar utarne ka mantra – Fever Mantra

1. बुखार उतारने के लिए शक्तिशाली रोगनाशक मंत्र

॥ॐ महाकालिनी सर्वरोगनाशिनी, ज्वरो यति दशो दिशः॥

विधि: सर्वप्रथम एक लोटे में शुद्ध जल भर ले और उसमें तीन तुलसी की पत्ती और एक चुटकी हल्दी डालें और फिर इस मंत्र का 51 बार जाप करें और लोटे के जल के ऊपर 11 बार फूंक मारे, ऐसा करने से वह जल अभिमंत्रित हो जाएगा अब इस जल को रोगी को पिलाएं और जल को पीने के बाद तीन तुलसी के पत्ते भी खाने को दें।

असर: बुखार उतारने के इस मंत्र से रोगी के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और तुलसी और हल्दी से रोग निवारण क्षमता शरीर में उत्पन्न होती है जिससे अति शीघ्र बुखार का असर शरीर से कम होने लगता है। प्रायः इस मंत्र के उपयोग के 2 या 3 दिन के भीतर ही रोगी को बुखार से छुटकारा मिलता है फिर भी हमारा आपसे आग्रह होगा कि इस विधि को लगातार तीन से चार दिन तक करें ताकि रोगी को संपूर्ण आराम प्राप्त हो।

2. बुखार उतारने का हनुमान मंत्र

॥ॐ नमो भगवते आंजनेयाय, महाबलाय स्वाहा
ॐ सर्वबाधा विर्निमुक्तो, धनधान्यसुतान्वित:॥

विधि: इस मंत्र के उपयोग के लिए सर्वप्रथम हनुमान जी के मंदिर जाएं और उनकी दाई भुजा की सिंदूर थोड़ी मात्रा में घर लेकर आए। अब इस सिंदूर को अपने दाहिने हाथ में रखकर इस मंत्र का 108 बार जाप करें और इस सिंदूर के ऊपर तीन बार फूंक मारकर इस सिंदूर को रोगी के माथे पर लगा दे।

असर: इस क्रिया को लगातार तीन दिनों तक करने से रोगी के शरीर से पूरी तरह से बुखार उतर जाता है और रोगी को मंत्रो का संपूर्ण लाभ प्राप्त होता है और हनुमान जी की कृपा से रोगी को अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

विशेष ध्यान: एक बात का विशेष ध्यान रखें कि जब इस मंत्र के उपयोग से रोगी को संपूर्ण राहत प्राप्त हो जाए तब रोगी के हाथ से किसी भी मंगलवार या शनिवार हनुमान जी के मंदिर में सवा किलो बेसन के लड्डू भोग के रूप में अर्पित कराएं, ऐसा करने से हनुमान जी की कृपा हमेशा रोगी पर बनी रहेगी और उसका स्वास्थ्य फिर कभी खराब नहीं होगा।

3. बुखार उतारने का कृष्ण मंत्र

विधि: अगर रोगी स्वयं अपने स्वास्थ्य के लिए इस मंत्र का उपयोग कर रहा है तो उसे एकांत में आंखें बंद करके इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए और अगर रोगी चाहे तो मंत्रों का जाप मन में ही कर सकते हैं। अगर इस मंत्र का जाप रोगी करने में सक्षम नहीं है तो रोगी का कोई भी रिश्तेदार या सगा संबंधी रोगी के पास बैठकर रोगी के कानों के पास इस मंत्र का उच्चारण कर सकता है।

असर: श्री कृष्ण का यह मंत्र रोगी के शरीर में एक दिव्य सकारात्मक ऊर्जा का संचार पैदा करता है जिससे रोगी के शरीर में रोग निवारण क्षमता बढ़ती है और उसे बुखार या रोगों से मुक्ति मिलती है। यह बुखार उतारने का मंत्र सबसे ज्यादा प्रभावशाली और दिव्य मंत्र है जो हमेशा शुभ परिणाम देता है।

बुखार दूर करने में मेरा आप सब से विनम्र निवेदन है कि सर्वप्रथम अपने वैद्य या डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें और उनकी बताई गई दवाइयों का सेवन समय पर करें और साथ ही इन मंत्रों का भी प्रयोग करें जिससे आपको 100% पूर्ण राहत प्राप्त हो।

बुखार उतारने के टोटके – Bukhar utarne ke totke

बुखार उतारने का यह काफी पुराना टोटका है जिससे आप घर में भी कर सकते हैं और इस टोटके से भी रोगी को काफी राहत प्राप्त होती है। इस टोटके को आप किसी भी दिन कर सकते हैं

विधि: सर्वप्रथम 11 साबुत खड़ी लाल मिर्च, थोड़ी सी राई के दाने और 11 काली मिर्च के दाने ले अब इन सामग्रियों को रोगी की सर से घड़ी की उल्टी दिशा की तरफ 11 बार वार ले और इसे घर से बाहर ले जाकर जलती हुई आग में डाल दें, ऐसा लगातार तीन दिनों तक करे।

असर: इस टोटके को करने से रोगी को बुखार से राहत मिलती है और अगर रोगी को किसी भी प्रकार का नजर दोष, शत्रु बाधा या तंत्र मंत्र या ऊपरी बाधा की समस्या होगी तो उससे भी निवारण प्राप्त होगा।

बुखार में मेरा आप सब से विनम्र निवेदन है कि सर्वप्रथम अपने वैद्य या डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें और उनकी बताई गई दवाइयों का सेवन समय पर करें और साथ ही इस टोटके भी प्रयोग करें जिससे आपको 100% पूर्ण राहत प्राप्त हो।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करता है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। Useful Info (usefulinfo.tech) इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है। किसी भी दवा, औषधि या उपचार को लेने से पूर्व चिकित्सक से परामर्श करें।

Source: thehealthsite.com, lybrate.com, myupchar.com, medicoverhospitals.in, healthlibrary.askapollo.com, hindi.webdunia.com, siddhamantrashakti.com


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